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"संस्थान के कार्य "
कृषि -
(१) जैविक खेती हेतुु प्रेरणा, प्रशिक्षण तथा सहयोग प्रदान करना ।
(२) औषधियां पोधों, तिलहन, दलहन फसलों फलों और फूलों की खेती हेतु प्रेरणा प्रशिक्षण सहयोग ।
(३) उन्नत जैविक पद्धति के बीजों का वितरण ।
(४) खेती हेतु शासकीय अशासकीय संस्थाओं के सहयोग से ऋण वितरण ।
(५) फसल का बीमा ।


पशु पालन:-

(१) मुर्गी पालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन हेतु शासकीय संस्थाओं, अनुसंधान केन्द्रों के सहयोग से प्रेरणा प्रशिक्षण सहयोग प्रदान करना ।
(२) दुग्ध उत्पादन की बढोतरी हेतु उन्नत किस्म के पशुआहार का उत्पादन व वितरण ।
(३) उन्नत नस्लों का प्रजनन हेतु अन्य कार्यरत ।
(४) संस्थाओं, शासन के सहयोग से जनजागरूकता प्रशिक्षण व विपणन ।
(५) पशु रोगों की रोकथाम हेतु टीकाकरण ।
(६) डेयरी संचालन ।
(७) पशु धन के क्रय हेतु शासकीय, अशासकीय संस्थाओं के सहयोग से ऋण वितरण ।
(८) पशु धन बीमा ।

बेरोजगारी उन्मूलन:-
(१) ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवकों-युवतियों हेतु कम अवधि के रोजगार परक कोर्सों का संचालन ।
(२) स्वरोजगार हेतु प्रेरणा, प्रसिक्षण सहयोग ।
(३) सासकीय, अशासकीय संस्थओं के सहयोग से ऋण वितरण ।

महिला विकास :-
ग्रामीण महिलाओं को घर से कर सकने वाले कार्य जैसे सिलाई, कढाई, बुनाई, खिलोने, रंगाई जैसे अन्य कार्य जिसमे महिलायें घर पर रहकर स्वयं या समूह में कार्य कर रोजगार प्राप्त कर सकें हेतु प्रेरणा, प्रसिक्षण सहयोग ।
शासकीय, अशासकीय संस्थओं द्वारा ऋण वितरण व अनुदान उपलब्ध करना ।

शिक्षा : -
प्रारम्भिक शिक्षा की उम्र खो चुके अशिक्षित निस्तरों को चिन्हित कर प्रेरित करना, उन्हें शिक्षित करना जिससे वह लोग समाज की मुख्य धारा से जुड़कर देस के विकास मे सहयोग कर सकें ।
आधुनिक युग मे कंप्यूटर, शिक्षा व अंग्रजी भाषा व अन्य विदेशी भाषाओँ के ज्ञान की आवश्यकता का महत्व समझते हुए । ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र - छात्राओं को प्रशिक्षित कर लाभान्वित करना ।

चिकित्सा : -
(१) बीमारियों की रोकथाम, बचाव के तरीकों के बारे मे जागरूकता कार्यक्रम का संचालन ।
(२) शासकीय, अशासकीय संस्थाओं के के माध्यम से टीकाकरण कार्यक्रम का संचालन ।
(३) नेत्र रोग, डायनटीज, हेपेटाइटिस, जैसी बीमारियों के परिक्षण हेतु कैम्प का संचालन ।
(४) स्वास्थ्य बीमा (बीमा कम्पनियों के सहयोग से) करना ।

प्लान्टेशन :-
तिश्चु कल्चर पद्धति द्वारा जनित सागौन
वर्तमान समय मे जनसंख्या वृद्धि के कारण खेत का बटबारे मे खेत छोटे होते जा रहें
कुछ कृषि भूमि ऐसी होती जाती है । जिसमे ट्रेक्टर पहुँचना या नहर का पानी पहुँचाना सम्भव
नहीं हो पाता, इस तरह की भूमि सागोन का पौधारोपण कर किसान अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं । इसे हम शोर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट भी कह सकते हैं ।
तिश्चु कल्चर पद्धति द्वारा जनित सागौन १०-१२ वर्ष में ३० मीटर की लम्बाई व २-३ मीटर की गोलाई प्राप्त कर लेता है । अधिकतम लम्बाई ४५ मीटर तक हो सकती है । परिपक्व वृक्ष का वर्तमान बाज़ार मूल्य ३०००० रुपये है ।
सागोन की लकड़ी अच्छी क्वालिटी का फर्नीचर फ्रेम दरवाजे आदि बनाने में इस्तेमाल होती है । सम्पूर्ण विश्व में इसकी डिमांड बनी रहती है।


 
 
 
 
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